महिला एवं बाल विकास विभाग गोंडा उत्तर प्रदेश

महिलाओं को सशक्त करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1989 में पूर्ण कालिक महिला एवं बाल विकास विभाग की स्थापना की गई महिलाओं के कलयाण सम्बन्धी कार्यक्रमों में गति शीलता लाने के उददेश्य से राज्य स्तरपर महिला कलयाण निदेशालय एवं बाल विकास पुष्टा हार निदेशालय की स्थापना की गई। अनाथालय एंव आन्य पूर्त आश्रम (पर्यवेक्षण एंव नियंत्रण 1960)के अन्तर्गत स्थापित उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड एवं केन्द्रीय समाज कल्याण बोड की राजय इकाई के रूप में राज्य सरकार क्षरा स्थापित राजय समाज कल्याण बोड को भी महिला एवं बाल विकास विभाग के नियंत्रणाधीन रक्खा गया है, ताकि इन संस्थाओं का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।


महिलाओं और बच्चों के विकास को वांछित गति देने क उददेश्य से भारत सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक हिस्से के रूप में "महिला एवं बाल विकास" विभाग की स्थापना वर्ष 1989 में हुई। एक राष्ट्रीय कार्यालय के रूप में कार्य करते हुये यह विभाग महिलाओं और बच्चों के विकास के लिये विभिन्न योजनायें, नीतियाँ और कार्यक्रम करता है तथा कई नियम भी लागू करता है। इसके साथ-साथ सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है, जो महिला एवं बाल विकास में योगदान दे रही है। विभाग महिलाओं एवं बच्चों के लिये कई प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करता है। यह कार्यक्रम कल्याण रोजगार और आय के लिये प्रशिक्षण एंवं उत्पादल जैसे अन्य कार्यो के बारे में बताते है। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रामीण विकास के कार्यो के लिये एक अतिरिक्त और प्रशंसात्मक किरदार निभाते है। यह सभी प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिये किये जाते हैं कि महिलाये आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से अधिकृत है अत: वे राष्ट्रीय विकास में पुरूषों के बराबर योगदान देती हैं।