History of Gonda

सुह्रध्वज को राजा सुहेल देव के नाम से भी जाना जाता है । सुहेलदेव के जाति के बारे में कई विद्वानों का अलग-अलग मत है'। कुछ लोग उन्हें भर ,कुछ लोग उन्हें क्षत्रिय और कुछ लोग उन्हें थारू समाज का वीर पुरुष मानते है । जनरल कनिंघम ने भी ग्यारहवी शताब्दी में इस क्षेत्र पर थारुओ का राज्य होने का उल्लेख किया है । 1033 ई० में सैयद सालार मसउद ने इस भू-भाग पर आक्रमण किया ,राजा सुहेलदेव ने सैयद सालार मसउद को हरा दिया । सुहेलदेव का एक बाण सैयद सालार मसउद को लगी जिससे उसकी मौत हो गयी'। वीर सुहेल देव की विजय ने इस भू-खंड कर शान्ति और धर्म का सुशासन स्थापित किया । 50 वर्षो तक राजा सुहेलदेव के पुत्र -पौत्र इस भू-भाग पर शासन करते रहे । तत्तपश्चात 1085 ई० में चन्द्रदेव गहडवाल ने इनको मर कर इस भू-खंड को अपने अधीन कर लिया और इस जनपद का शासन फिर कन्नौज से होने लगा । गोंडा कन्नौज साम्राज्य का एक प्रान्त रह गया । चन्द्र देव के बाद उनका पुत्र मदनपाल और पौत्रं गोविन्द चन्द्र प्रतापी राजा हुए । गोविन्द चन्द्र 1109 ई० में तुर्को के आक्रमण को विफल कर दिया गोविन्द चन्द्र के बाद उसका पुत्र विजय चन्द्र राजा हुआ । तत्पश्चात उसका पुत्र जय चन्द्र सिगासन पर बैठा । 1194 ई० में शहाबुद्दीन गोरी ने जय चन्द्र को युद्ध में मार डाला । तत्पश्चात जय चन्द्र का बेटा हरीश चन्द्र गद्दी पर बैठा किन्तु 1125 ई० में इल्तुतमिश ने कन्नौज पर अधिकार करके गहडवाल वंश का अंत कर दिया । 1226 ई० में इल्तुतमिश ने अपने जेष्ठ पुत्र मालिक नासिरुद्दीन को अवध का सूबेदार नियुक्त किया । इस प्रकार प्रथम मुस्लिम शासक कहा जाता है । नासिरुद्दीन का उद्देश्य केवल इस भू-भाग को जितना ही नहीं था बल्कि हिन्दुओ को जबरन इस्लाम कबूल करवाना था । उसने तराई में लाखो हिन्दुओ का क़त्ल करवाया । कईयो ने इस्लाम कबूल कर लिया तो कई पहाड़ो में जा बसे । इतिहास के अनुसार इस गोंडा पर कलहंस वंश का भी शासन रहा । कलहंस क्षत्रिय बस्ती ,गोंडा ,बहराइच जनपदों में बसे पाए जाते है । कलहंस क्षत्रियो ने अपने पितामह राणा मोकल के नाम पर मोकलपुर गाँव बसाया जो गोंडा के निकट है और आज भी उन्ही के नाम से जाना जाता है । कलहंस क्षत्रियो ने अपने वंश के गौरव के प्रतीक नगर गोगुंडा के नाम पर गोंडा नगर की स्थापना की ।कल्हंसो ने कलहंस की राजधानी कोड्सा (वर्तमान खुरासा) में बसाई । कल्हंसो के राजा सहज सिंह के पश्चात् क्रमशः शक्ति सिंह ,हरपाल सिंह ,भैरो भान सिंह ,हरनाथ सिंह ,हरसुख राय तथा अचल नारायण सिंह ने लगभग 200 वर्षो तक गोंडा पर राज किया । अचल नारायण सिंह की मृत्यु के बाद इस वंश का शासन समाप्त हो गया ।