कल्हंसो ने कलहंस की राजधानी कोड्सा (वर्तमान खुरासा) में बसाई । कल्हंसो के राजा सहज सिंह के पश्चात् क्रमशः शक्ति सिंह ,हरपाल सिंह ,भैरो भान सिंह ,हरनाथ सिंह ,हरसुख राय तथा अचल नारायण सिंह ने लगभग 200 वर्षो तक गोंडा पर राज किया । अचल नारायण सिंह की मृत्यु के बाद इस वंश का शासन समाप्त हो गया । अवध क्षेत्र पर मुस्लिम शासन के आरम्भ काल से ही इस मंडल पर बहुत से ही तालुको की स्थापना हुई जिसमे मनकापुर ,बलरामपुर ,खोरासा (गोंडा) प्रमुख थे । जिससे आगे चल कर कुछ नए तालुको की स्थापना हुई । धीरे -धीरे देवीपाटन मंडल के भू-क्षेत्र पर तुलसीपुर ,उतरौला ,इकौना और बोंडी ,नानपारा तथा पयागपुर जैसे बड़े तालुको सहित कुल पैतालीस तालुको ने अधिकार कर राज किया ।

बभनीपायर तालुका

कालान्तर में राजा अचल नारायण सिंह के पुत्र भृंग शाह ने बस्ती जनपद के रसूलपुर गौस और गोंडा जनपद में परगना बूढ़ापायर व बभनीपायर तथा परगना मानिकपुर का कुछ भाग मिला कर एक छोटा सा राज्य अधिकृत किया । जो बभनीपायर तालुका के नाम से जाना जाता था । भृंग शाह के पश्चात् क्रमशः परसराम शाह ,कीरत शाह ,बहादुर शाह शालवाहन सिंह और मधुकर सिंह बभनीपायर तालुके के स्वामी हुए । सन 1857 के स्वाधीनता संग्राम के पश्चात् तालुके का बंदोबस्त विधवा रानी सरफरोज कुवरि के नाम से किया गया । सन 1867 ई० में तालुका कोर्ट ऑफ़ वार्ड्स के अधीन चल गया । बभनीपायर तालुके का क्षेत्रफल 2548 एकड़ एवं राजस्व 1729 रुपये था । गोंडा गजेटियर ,अवध के दरवार में इस तालुके का नंबर 160 था ।

परसपुर राज

परसपुर राज के संस्थापक राम सिंह थे । इनके प्रपौत्र दल सिंह ने दिल्ली सम्राट से राजा की उपाधि प्राप्त की थी । दलसिंह के बाद उनका जेष्ठ पुत्र गज सिंह 1680 ई० में परसपुर के राजा हुए । 1877 में गजसिंह के वंशज महिपत सिंह परसपुर के राजा हुए । इस राजा ने 1877 ई० में ब्रिटिश सरकार की ओर से तालुके की सनद और राजा की पदवी स्थायी तौर पर प्राप्त की । परसपुर तालुके का क्षेत्रफल 26791 एकड़ एवं राजस्व 33471 रुपये था । अवध के दरवार में परसपुर का नंबर 33 था ।

आटा तालुका

आटा तालुका के प्रथम शासक बाबूलाल शाह हुए । इनके उतराधिकारी छतर सिंह और दशरथ सिंह ने तालुके के क्षेत्रफल में प्रयाप्त वृद्धि की थी किन्तु विसेन राजाओ के कारण इनका काफी भू-भाग निकल गया । दशरथ सिंह के पश्चात् अजित सिंह ,मरदन सिंह ,अमर सिंह और विजय सिंह तालुके के स्वामी हुए । आटा तालुके का क्षेत्रफल 10837 एकड़ एवं राजस्व 14085 रुपये था । अवध के दरबार में इस तालुके का नंबर 134 था ।

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